Posted by: ashwiniramesh | May 22, 2011

—–अन्तर—-कविता (यहां लिंक क्लिक करें)

                                   —अन्तर—-

माँ !

तुम बांध क्योँ नहीं लेती

सत्तू

छाछ

जौ और कुकडी*के

पकवानों की यादों की पोटली

मैं आज गांव छोड़कर

शहर जा रहा हूँ

वह सब देखने

जो मैंने

यहां नहीं देखा

वह सब करने

जो मैंने

यहां नहीं किया

और

वह सब पाने और भोगने

जो यहां नहीं पाया और भोगा

या इससे भी बढकर

शायद अपनी अस्मिता की तलाश में

क्योंकि

आज

मेरी इच्छाएं और विवशताएं

एक होकर

मुझे

यहां से

दूर ले जाना चाहतीं हैं

और

अब तुमसे

बगावत करने के अतिरिक्त

मुझे कोई दूसरा रास्ता

दिखाई ही नहीं देता

यह जानते हुए भी कि

मुझे एक न एक दिन

वापस गांव तो

लोटना ही होगा

लेकिन तब तुम नहीं होगी

और मेरे लिए

गांव या शहर में

तब

केवल थोड़ा सा ही

अन्तर रह जाएगा

शब्दों का

‘गांव’

और

‘शहर’

———–

१.कुकडी*- अर्थ-मक्की !

                                             (प्रस्तुत कविता, मेरे काव्य-संग्रह-“जमीन से जुड़े आदमी का दर्द से उद्धृत की गयी है-अश्विनी रमेश )


Responses

  1. ATI SUNAR KRITI

    DEEPAK

    • Thank you Deepak jee,
      You seem to be very dedicated for cause of Himachali people,but there are very few who understand the value of good literature.


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

Categories

<span>%d</span> bloggers like this: